GONDIA: करोड़ों की जमीन, कौड़ियों का मुआवजा!

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गुदमा–प्रतापबाग नई रेल लाइन को लेकर भू-धारकों में भयंकर आक्रोश; 7 सितंबर को कटंगी नाका पर रास्ता रोको आंदोलन

गोंदिया। गुदमा–प्रतापबाग नई रेलवे लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर गोंदिया तालुका के प्रभावित किसानों और भू-धारकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। कटंगी कला, नागरा, हल्बी टोला, सावरी सहित गोंदिया खुर्द, खमारी, दागोंटोला, चुल्लोद, दातोरा, घीवारी, चांदनीटोला और लोधीटोला क्षेत्र के अनेक किसानों की खेती, जमीन, मकान, प्लॉट और दुकानें रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही हैं। प्रभावित भू-धारकों का आरोप है कि रेलवे विभाग द्वारा करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन के बदले बेहद कम मुआवजा निर्धारित किया जा रहा है। इससे किसानों में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।

अधिग्रहण की मुआवजा राशि से संबंधित पत्र किसानों को प्राप्त होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया। किसानों का कहना है कि जिस क्षेत्र में जमीन के बाजार मूल्य करोड़ों रुपये तक हैं, वहां शासन द्वारा निर्धारित मुआवजा वास्तविक बाजार मूल्य की तुलना में बेहद कम है। ऐसे में पीढ़ियों से संजोकर रखी जमीन को इतनी कम राशि में देने का सवाल ही नहीं उठता। इसी मुद्दे को लेकर 23 अगस्त 2026 को ग्राम पंचायत कटंगी कला के सभागृह में प्रभावित किसानों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपस्थित भू-धारकों ने एक स्वर में कम मुआवजा राशि पर तीखा विरोध जताया।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि रेलवे को किसानों की जमीन चाहिए तो प्रभावित परिवारों की जायज मांगों को पूरा करना होगा। किसानों ने स्पष्ट किया कि उचित मुआवजे और पुनर्वास संबंधी मांगों का समाधान किए बिना जमीन अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इसके बाद 24 अगस्त को गोंदिया के उपविभागीय अधिकारी को मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में प्रभावित भू-धारकों ने प्रमुख रूप से मांग की कि जिनकी जमीन, मकान, प्लॉट अथवा दुकान अधिग्रहण में जा रही है, उनके परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी दी जाए। साथ ही जमीन, मकान, प्लॉट और दुकान का मुआवजा बाजार मूल्य से पांच गुना अधिक दिया जाए।

किसानों ने यह भी मांग उठाई कि जिन भू-धारकों की आधी या उससे अधिक जमीन अधिग्रहित होने के बाद शेष जमीन खेती अथवा अन्य उपयोग के योग्य नहीं रह जाती, उस बची हुई जमीन का भी उचित मुआवजा दिया जाए। रेलवे लाइन के निर्माण के कारण खेतों तक पहुंचने वाले पारंपरिक रास्ते और पानंद रास्ते बंद होने की स्थिति में प्रभावित किसानों के खेतों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्तों का निर्माण भी किया जाए।

प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद मांगों पर अपेक्षित समाधानकारक प्रतिक्रिया नहीं मिलने से किसानों का असंतोष और तीव्र हो गया है। इसी पृष्ठभूमि में मयूर लॉन, कटंगी में बैठकीत ली गई, जिसमे प्रभावित भू-धारकों ने आंदोलन को निर्णायक दिशा देने का फैसला किया।

बैठक में गोंदिया तालुका अंतर्गत आने वाले गुदमा, गोंदिया खुर्द, खमारी, दागोंटोला, चुल्लोद, दातोरा, हल्बीटोला, घीवारी, चांदनीटोला, लोधीटोला, कटंगी कला और नागरा सहित विभिन्न गांवों के प्रभावित भू-धारक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक में किसानों ने एक बार फिर मुआवजा पांच गुना बढ़ाने, प्रभावित परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी देने, अधिग्रहित क्षेत्र से संबंधित अतिरिक्त मुआवजा देने तथा खेतों तक रास्ता उपलब्ध कराने की मांग को प्रमुखता से रखा।

बैठक में किसानों के तेवर बेहद आक्रामक नजर आए। भू-धारकों ने साफ शब्दों में कहा कि विकास परियोजना के नाम पर किसानों की जमीन ली जा रही है, लेकिन उनकी जमीन का उचित मूल्य नहीं दिया जा रहा। किसानों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत किसानों के साथ अन्याय करके नहीं चुकाई जा सकती।

अब किसानों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। बैठक में निर्णय लिया गया कि मांगों का उचित निराकरण नहीं होने पर 7 सितंबर 2026, सोमवार को दोपहर 12 बजे कटंगी नाका, बालाघाट रोड, गोंदिया पर रास्ता रोको आंदोलन किया जाएगा। आंदोलन के माध्यम से रेलवे प्रशासन और शासन तक किसानों की आवाज बुलंद की जाएगी।

बैठक में अखिलेश सेठ, कार्तिक चौहान, सूरज बावनकर, सुप्रीत बैंस, राजू चन्नेकर, राजू बिसेन, राधाकृष्ण ठाकुर, चूटे गुरुजी, अय्यूब शेख, जितेंद्र लिल्हारे, गजेंद्र कवास सहित सैकड़ों प्रभावित भू-धारक उपस्थित थे।

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